Indian teacher in American Class room

Indian teacher in American Class room

Posted on: Fri, 10/30/2020 - 17:51 By: admin

आज मौका था अमेरिकी बच्चों के सामने एक प्रेजेंटेशन देने का। ये बच्चे sophomore कहलाते हैं। मैंने यह शब्द यहीं आकर सुना है शुरू में एक आध बार तो बोलना भी नहीं आ रहा था। वैसे दसवीं क्लास में पढ़ने वाले बच्चों को सॉफमोर कहते हैं। इन बच्चों ने AP, बोर्ड का चयन किया हुआ है और इन्हें बाकी बच्चों से ज्यादा पढ़ना पड़ता है। 60 के आस-पास बच्चे क्लास में थे जिनको इतिहास और अंग्रेजी के शिक्षक एक साथ मिलकर पढ़ाते हैं। इंटीग्रेटेड टीचिंग का यह एक प्रयोग है।

मेरे प्रजंटेशन का पहला हिस्सा था बच्चों को यह बताना कि मैं यहां क्यों हूं और TEA(teaching excellence and achievement) प्रोग्राम के बारे में एक ब्रीफ मैंने बच्चों को दिया, प्रेजेंटेशन के दूसरे हिस्से में भारत के बारे में कुछ जानकारी देनी थी और इसकी शुरुआत मैंने यहीं पर आकर सीखे हुए टेक्नोलॉजी पर आधारित एक गेम- kohoot के साथ की। बहुत मजेदार गेम है यह। बहुविकल्पीय प्रश्नों वाला एक सवाल बच्चों के सामने स्क्रीन पर होता है और इसका जवाब बच्चे अपने मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए देते है। भारत से जुड़े हुए करीब 10 सवाल, सामान्य जानकारी के सवाल मैंने बच्चों से पूछे और यह जानकर आश्चर्य हुआ कि इनमें से कई सवालों के जवाब अधिकतर बच्चों को पता था।

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इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल इन बच्चों के सिलेबस का हिस्सा है और इन को बढ़ाने वाले मेरे पार्टनर टीचर ने मुझे सलाह दी थी कि यह अच्छा होगा कि मैं उस बारे में भी जिक्र करूँ। इतिहास और खास करके, आधुनिक भारत के इतिहास में ही मैंने स्नातकोत्तर की पढ़ाई की हुई है। 10 से 15 मिनट के समय में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बारे में चर्चा करना एक बहुत ही मुश्किल काम है। यह एक बहुत ही पेचीदा सवाल बन जाता है कि फिर आप किस बारे में बात करेंगे। जाहिर है मैंने गांधी और उनसे जुड़े हुए आंदोलनों की बात की, खास करके नमक सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन और सत्याग्रह से जुड़े हुए गांधी के विचार। इन्हीं मुद्दों पर आधारित गांधी फिल्म से कुछ क्लिपिंग्स भी बच्चों को दिखाया।

प्रेजेंटेशन का अगला हिस्सा था कि अपने यहाँ कि शिक्षा व्यवस्था और खास करके अपने स्कूल के बारे में कुछ बात बतायी जाए। मेरे पास करीब 50 तस्वीरें अपने स्कूल की थी जिसको मैंने Google के फोटो ऐप में जाकर एक मूवी में तब्दील कर दिया था। प्रेजेंटेशन की शुरुआत, दिल्ली के शिक्षा मंत्री के उस मैसेज से की जिसे उन्होंने खासकर हम लोगों के लिए रिकॉर्ड किया था । दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री मनीष सिसोदिया को हाल ही में भारत के सबसे बेहतरीन शिक्षा मंत्री होने का खिताब मिला था और उनका मैसेज वर्ल्ड कम्युनिटी को यह बताने के लिए था कि भारत शिक्षा को लेकर कितना प्रतिबद्ध है और इसका प्रयोग दिल्ली में शुरू हो चुका है। यहां पर लोगों को यह बात हैरान कर देती है कि कोई शिक्षा मंत्री इस तरह से शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाता है, वह अपने शिक्षकों को जानता है। वह अपने शिक्षको को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मेरे साथ यहां 40 अलग-अलग देशों के शिक्षक हैं, उनमें से कई साथी बताते हैं कि अपने शिक्षकों के लिए किसी शिक्षा मंत्री को उन्होंने इस तरह से प्रतिबद्धता जताते हुए कभी नहीं देखा है।

प्रेजेंटेशन का आखरी हिस्सा, सवाल और जवाब के लिए था। बच्चों ने कई सवाल पूछे लेकिन उनके एक सवाल पर मैं बिल्कुल खामोश हो गया। सवाल था कि अमेरिकी स्कूल व्यवस्था को भारतीय स्कूल व्यवस्था से क्या सीखने की जरूरत है। मैं तो एकतरफा ही सोचा जा रहा था। मैंने तो सिर्फ यह सोचा था कि भारतीय स्कूल व्यवस्था को अमेरिका से क्या सीखने की जरूरत है। कुछ देर चुप रहने के बाद मैंने बच्चे को बताया कि अगर एक चीज भारत से सीखी जा सकती है तो वह है कि बच्चों को बंदूक का इस्तेमाल ना करने दिया जाए।

आज के अंक में इतना ही आपको कुछ तस्वीर और दिल्ली के शिक्षा मंत्री के उस मैसेज के साथ छोड़ता हूं जो उन्होंने वर्ल्ड कम्युनिटी के लिए दी है।