The Teachers’ Minister

The Teachers’ Minister

A friend …..Like minded concerned citizen who is a minister’

यह मैसेज माननीय शिक्षा मंत्री जी ने मेरे उस मैसेज के जवाब में लिखा जो गलती से मैंने उन्हें भेज दिया था। दरअसल मैं अपने मित्रों को लिख रहा था ‘Can’t believe just got a call from minister’. हम इस बात से आश्चर्यचकित हो रहे थे कि इतने व्यस्त दिनचर्या के बीच वह यह समय कहाँ से निकाल पाते हैं कि अपने शिक्षकों से भी पूछ लें कि कहाँ तक पहुँचा है काम।
यह कोई साधारण पंक्ति नहीं है। शिक्षा मंत्री अपने शिक्षक के लिए लिख रहे हैं- A friend. अक्सर ऐसा देखा गया है कि प्रधानाध्यापक के आने पर अगर शिक्षक खड़े नहीं हो पाते हैं तो उसी वक्त उन्हें डाँट पड़ जाती है। इस तरह के सत्ता आधारित व्यवस्था में शिक्षा मंत्री का अपने शिक्षकों के लिए आसानी से उपलब्ध होना कोई साधारण बात नहीं है।
इस बात में उनकी गहरी श्रद्धा है कि क्लास रूम में पढ़ने-लिखने के माहौल में परिवर्तन लाने में शिक्षकों की बड़ी भूमिका है। शिक्षकों के नाम अपने खत में वे शिक्षकों को हवाई जहाज़ के पायलट के रूप में संबोधित करते हैं जहाँ वे मानते हैं कि हवाई जहाज़ को उड़ाने की ज़िम्मेदारी शिक्षकों की है, बाकी सारी व्यवस्था उनको मदद करने के लिए है। और यह बात सिर्फ़ कहने भर की नहीं, उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए जो शिक्षकों के प्रति उनकी मान्यता को दिखाता है।
शुरूआती दिनों की किसी घटना का ज़िक्र करते हुए एक बार वह बता रहे थे कि शिक्षकों के प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था के लिये शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने एस.सी.ई.आर.टी. के बजट को करीब-करीब 9 करोड़ से बढ़ाकर 120 करोड़ करने का निर्देश दिया, वही फाइल जब उनके पास वापस पहुँची जहाँ उन्हें वित्त मंत्री के रूप में फैसला लेना था तो उन्होंने देखा 120 करोड़ के बजट को घटाकर करीब 70 करोड़ के आस-पास कर दिया गया था। इसके पीछे की वजह जब उन्होंने जानना चाहा तो उन्हें बताया गया कि शिक्षकों के प्रशिक्षण पर इतना खर्च करने की क्या ज़रूरत है। लेकिन अपनी प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने उस बजट को फिर से 120 करोड़ तक पहुँचाया।

इतिहास में पहली बार स्कूली शिक्षकों तथा प्रधानाध्यापकों को विदेश में प्रशिक्षण पाने का मौका मिला। शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को कैंब्रिज, फिनलैंड, हॉवर्ड तथा सिंगापुर जैसी जगहों पर जाकर प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिला। बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापकों को IIM अहमदाबाद, प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। बड़ी संख्या में शिक्षकों को देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर शिक्षा में हो रहे परिवर्तनकारी कार्यों को देखने का मौका मिला। अलग-अलग समूह में शिक्षक लखनऊ, फैज़ाबाद ,बैंगलोर ,चेन्नई, पुडुचेरी, मुंबई, मेघालय,जयपूर इत्यादी जगहों पर गए और वहाँ होने वाले शिक्षण के कार्यों को देखा और बाद में उसे अपने साथियों के साथ साझा किया। इस संबंध में एक घटना का जिक्र करते हुए एक बार मंत्री महोदय बता रहे थे कि उन्हें किसी ने सुझाव दिया कि क्यों न इन अलग-अलग देशों से प्रशिक्षकों को बुलाकर अपने यहाँ ही प्रशिक्षण की व्यवस्था करवा लेते हैं जो कि बहुत सस्ता होगा। इस पर उनका जवाब था कि हम अपने शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को सिर्फ़ प्रशिक्षण के लिए ही नहीं भेज रहे हैं, हम उन्हें एक्सपोज़र देना चाहते हैं ताकि वे देख सकें कि दुनिया में किस प्रकार सीखने और सिखाने का काम हो रहा है। जिससे वह अनुभव कर सकें और अपने अंदर एक विश्वास पैदा कर सकें कि इन परिवर्तनों को लाने में उनकी भी एक प्रमुख भूमिका है।

मैं मानता हूँ कि शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का विदेश जाना आने वाली शिक्षकों के पीढ़ी के लिए सपना पैदा करता है किस शिक्षा का क्षेत्र भी उतना ही ग्लैमरस है जितना शायद IT, Medical या कोई और क्षेत्र। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है कि हम शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभावान युवाओं को आकर्षित कर सकें।
Mentor Teacher प्रोग्राम टीचर डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटर(TDC) प्रोग्राम के ज़रिए उन्होंने हज़ारों शिक्षकों को मौका दिया है प्रोफ़ेशनल डेवलपमेंट का। पारंपरिक रूप से हम शिक्षकों को स्कूल और क्लासरूम तक ही बाँधकर देखते आए हैं। MT एवं TDC प्रोग्राम के ज़रिए उन्होंने मौका दिया शिक्षकों को रिसर्चर बनने का, कंटेंट डेवेलप करने का, टीचर ट्रेनर बनने का, इत्यादि। अभी तक इन सभी कार्यों के लिए शिक्षकों को कोई खास मौका नहीं मिलता था। एक आध शिक्षक अपने व्यक्तिगत प्रयास से इन कार्यों में लगे हुए थे लेकिन पहली बार एक संस्थागत प्रयास के ज़रिए बड़ी संख्या में शिक्षकों को इस तरह का मौका दिया गया है। यह अपने आप में हैरान करने वाली बात है कि इन सभी शिक्षकों से शिक्षा मंत्री जी का सीधा संवाद है।

शिक्षकों के सम्मान में आयोजित की जाने वाली ‘स्टेट टीचर अवॉर्ड’ के कार्यक्रम का आयोजन बहुत ही भव्य रूप से किया जाता है। दिल्ली की सड़कें शिक्षकों की तस्वीर वाले हॉर्डिंग्स से भर दी जाती है। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि शिक्षकों को आगे रखकर जश्न मनाया जाता हो, उनको सेलिब्रेट किया जाता हो।
शिक्षकों के प्रति उनका इतना लगाव है कि मंत्री स्तरीय डेलिगेशन में भी वे शिक्षकों को शामिल करना नहीं भूलते। हाल ही में एशिया के शिक्षा मंत्रियों का एक सम्मेलन हुआ था जिसमें मंत्री महोदय के डेलिगेशन का हिस्सा बनने का मौका मुझे भी मिला था। जिस गर्व के साथ वे अपने शिक्षकों का अलग-अलग देश के मंत्रियों से परिचय करवाते थे यह देखना मुझे आश्चर्यचकित करता था। वे हमेशा ‘टीम एजुकेशन’ की बात करते हैं और किसी भी टीम एजुकेशन की कल्पना वे बिना शिक्षकों के नहीं करते हैं। वे अक्सर बताते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य मानव संसाधन नहीं मानव बनाना है। मानव बनाने की इस प्रक्रिया में शिक्षकों की भूमिका के प्रति उनका विश्वास बहुत गहरा है।

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