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सरकारी स्कूलों पर विश्वास बहाली का दस्तावेज है पुस्तक- ‘उम्मीद की पाठशाला’

सरकारी स्कूलों की वर्तमान दुर्दशा की कहानी से कौन परिचित नहीं है? वास्तव में यह कहानी हमारे अपने समाज और उसके सपनों के पतन की कहानी ही है। ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूली व्यवस्था कभी पूर्ण संपन्न रूप से अपने उरूज पर थी और अब वह अपनी संपन्नता से लुढ़क कर रसातल को चली आई है। कमोबेश अपनी संसाधन क्षमता और भूमिका में वह बहुत अच्छी स्थिति में कभी भी नहीं थी। पर सत्तर-अस्सी के दशक और खासकर उदारीकरण-बाजारीकरण की आँधी के बाद बेशक जिस कच्ची-पक्की जमीन पर उसके पाँव थे वह भी उखड़ने लगे। पहले निजी स्कूलों की न्यून उपस्थिति में कमोबेश सभी समूहों-वर्गों के बच्चे इसी व्यवस्था से निकलते थे। पर इस नये दौर में यह द्वैध अलिखित रूप से स्थापित हो गया कि संविधान की भावना और शैक्षिक दस्तावेजों में बार-बार सबके लिए समान स्कूली प्रणाली की प्रतिबद्धता के बावजूद शिक्षा की कई परतें होंगी।

“I am disappointed and in dilemma what should I do”

For a profession to attract outstanding students, it has to be desirable. It’s not difficult to understand what desirability is. We just need to ask a simple question… What are our outstanding students aspiring for? With common sense, one can answer- It’s medical, engineering and civil services. What makes these professions desirable? It is…regular and decent pay, greater career mobility, the opportunity for global exposure and a sense of agency.

कक्षा में शिक्षक

किसी कक्षा में एक शिक्षक क्या करे और क्या न करे इस विषय पर काफी कुछ कहा और लिखा जा चुका है।मेरी समझ से यह विषय इतना सरल भी नहीं है न ही इसे इतने हल्के में लिया जाना चाहिये। बल्कि शिक्षाविदों, शिक्षकों व बच्चों के दायरे में आने वाले इस महत्वपूर्ण विषय पर इससे प्रभावित होने वाले लोगों द्वारा गहन विचार विमर्श करके सहमति बनाई जानी चाहिए। इसे सरल मैं इसलिए नहीं मान रहा क्योंकि इसमें बाल मनोविज्ञान से लेकर शैक्षिक सिद्धांतों, दर्शन व व्यवहारिक ज्ञान का समावेश भी होता है। एक शिक्षक के रूप में अपने वर्षों के अनुभव से मैं इस संबंध में जो कुछ समझ बना पाया हूँ उसके अनुसार एक शिक्षक कक्षा में जो कार्य व्यवहार करता है उसे तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है। पहला है कक्षा कक्ष प्रबंधन, दूसरा नियोजन के अनुरूप पाठ कार्यान्वयन और तीसरा आकलन व्यवहार

स्कूलों में हाशियाकरण का शिकार होता हिंदी शिक्षण

मध्यवर्गीय अपेक्षाओं को अभिव्यक्ति देती आधुनिक स्कूली शिक्षा में हिंदी पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए काम करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। हिंदी दिवस पर हिंदी की महिमा उनकी समस्याओं का समाधान तो नहीं कर सकता लेकिन शायद उनकी समस्याओं को समझने में और उसके आसपास बातचीत शुरू करने में जरूर मदद कर सकता […]

Oh My God, Your Education Minister, Can’t Believe It !

“मैं अगर आपको कहूँ कि उस दूसरे कमरे में जाकर जेंटलमैन को बुला लाइये, अगर वहाँ तीन लोग खड़े हो, जिसमें से किसी एक ने सूट और टाइ पहन रखा हो तो आप सूट वाले को बुला लाएँगे। ये कैसे होता है, कब हमने जेंटलमैन की परिभाषा गढ़ दी” यह पहला मौका था जिसने मुझे […]