Tag: children

Reflection of a teacher on Teacher’s day

By Alok kumar Mishra शिक्षक दिवस पर एक शिक्षक के विचार सोचता हूँ एक शिक्षक के रूप में शिक्षक दिवस को मुझे किस रूप में लेना चाहिए। क्या मुझे उत्सव के मूड में होना चाहिए ?, अपने विद्यार्थियों और समाज से अपने खुद के लिए और पूरे शिक्षक समुदाय के लिए आदर व सम्मान की […]

शिक्षकों के गैर पेशेवर पहचान को बढ़ावा देती नई शिक्षा नीति।

पिछले दशकों में स्कूली शिक्षा का विस्तार हुआ है स्कूल जाने वाले उम्र के करीब करीब सभी बच्चे स्कूल में दाखिला लेते हैं। भारत में प्राथमिक कक्षाओं में NER100% तक पहुंच गया। लेकिन एक और विचित्र घटना इसके साथ साथ हो रही थी। जहां एक और शिक्षा का विस्तार हो रहा था वहीं दूसरी ओर शिक्षक के पेशेवर पहचान को महत्वहीन बनाया जा रहा था। एक ऐसा माहौल बनाया गया जहां बड़ी संख्या में गैर पेशेवर लोग भी शिक्षक की भूमिका में आ सकते हैं। ऐसा करने के पीछे मकसद यह रहा कि स्कूली शिक्षा पर होने वाले खर्च को घटाया जाए क्योंकि पेशेवर शिक्षक के वेतन की वजह से सरकारों पर खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा था। तमाम ऐसे शोध करवाए गए जिससे यह साबित हो सके की गैर पेशेवर लोग भी जब शिक्षक बनते हैं तो वे बच्चों को बेहतर पढ़ाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में संसाधन तो बचाया जा सका लेकिन शिक्षा को नहीं। गुणवत्ता के नए मानक गढ़ दिए गए। लेकिन खोखले मानक अधिक दिनों तक टिक नहीं सकते है।आज हमारे सामने ऐसी परिस्थिति है जहां स्कूलों में 95- 97% नंबर लाने वाले बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। हमारे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अत्यधिक दबाव में जीते हैं।  कई तरह की मानसिक और व्यावहारिक असंगतियाँ उनके व्यक्तित्व में पैदा हो रही है। एक समाज के तौर पर हमें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।