How We Think_John Dewey

How we Think by John Dewey

हाल ही में जॉन डीवी द्वारा लिखित किताब हाउ वी थिंक (How we think)सुनने का मौका मिला। यह सुनने में कुछ अटपटा सा लग रहा होगा। किताब के लिए अक्सर हम पढ़ने शब्द का इस्तेमाल करते हैं लेकिन टेक्नोलॉजी ने इसको सुनना भी आसान बना दिया है। वैसे कोई बहुत नई बात नही है। पारंपरिक रूप से भी भारत में किताबों को सुनने की एक परंपरा रही है। यहां कोई एक व्यक्ति पढ़ते थे और बाकी लोग उनके आसपास इकट्ठा होकर सुना करते थे। एक सामूहिक पाठ होता था । टेक्नोलॉजी ने सुनने को व्यक्तिगत प्रक्रिया बना दिया है। आपके हाथ को सुशोभित करने वाला, हमेशा महत्वपूर्ण स्थान बनाए रखने वाला, आपका मोबाइल फ़ोन, आप जब चाहे आपके पसंदीदा किताब को आपके लिए पढ़कर सुना सकता है।

बात करते हैं इस किताब के बारे में!

1910 में जब पहली बार इस पुस्तक को प्रकाशित की गई तो शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि 2018 में भी यह पुस्तक उतना ही प्रासांगिक होगा। कुछ पुस्तकें अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने में समय की सीमाओं को लाँघ जाती है। यह किताब उसीका एक बेहतरीन उदाहरण है।
किसके लिए उपयुक्त है किसे सुनना चाहिए या पढ़ना चाहिए?
मुझे लगता है कि किसी विषय विशेष से इस किताब को जोड़ देना एक नाइंसाफी होगी। आखिरकार मनुष्य होने के कारण विचारों की प्रक्रिया को समझना हम सब के लिए आवश्यक है । चाहे हमारा पेशा कुछ भी क्यों न हो। विचार की शक्ति के कारण हम बाकी प्रजातियों से अपने आप को अलग कर पाते हैं। हम अपने दैनिक जीवन में इसका इस्तेमाल करते हैं। समाज, परिवार, देश, स्कूल और तमाम सारी संस्थाएं हम सब के बदले विचार करने का दावा करती है और यह संस्थाएं यह उम्मीद करती है कि उन विचारों को हम अपना लें और विचार करने के व्यक्तिगत कार्य से मुक्ति पा लें। शायद यह भी एक वजह हो सकती है कि क्यों हम संस्थाओं के वर्चस्व को अपने जीवन मे आसानी से स्वीकार कर लेते हैं। विचार करने का कार्य निसंदेह आसान नहीं है। विचार करने की प्रक्रिया के अलग-अलग आयामों को समझने मे यह किताब बहुत ही मददगार साबित हो सकती है। विचारों के संबंध में लिखते हुए जॉन डिवी जिक्र करते हैं कि अलग अलग घटनाओं के बीच एक रिश्ता ढूंढना विचार का एक मुख्य कार्य है।
क्या ऐसा खास है?
विचार करने की प्रक्रिया के संबंध में बात करते हुए डिवी कुछ बेहतरीन उदाहरण देते हैं ।सारे उदाहरण हमारे दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ होता है।जिससे कठिन अवधारणाओं को समझने में आसानी होती है। उदाहरण के लिए एक जगह वह लिखते हैं
“जिस प्रकार व्यापार में या किसी व्यवसाय में हम यह नहीं कह सकते हैं कि हमने कोई सामान बेच दिया है जब तक कि उसे कोई खरीद ना ले, इसी प्रकार हम यह दावा नहीं कर सकते हैं कि हमने किसी को कुछ सिखा दिया है जब तक की वह सीख न ले।”
एक शिक्षक के लिए यह कितना महत्वपूर्ण उदाहरण है। बच्चों को महज कुछ बातें बता देना ही पढ़ा देना नहीं होता है यह सुनिश्चित करना कि बच्चे वह बात सीख रहे हैं पढ़ाने का ही हिस्सा है।

अगर आपकी दिलचस्पी कुछ गूढ़ सवालों में हो जैसे कि
एब्स्ट्रेक्ट और कंक्रीट थिंकिंग क्या होती है?
क्या बच्चे भी विचार कर पाते हैं?
एम्पेरिकल और साइंटिफिक थिंकिंग क्या होती है अर्थात अनुभव आधारित तथा वैज्ञानिक थिंकिंग क्या होती है?
भाषा का विचार से क्या संबंध है?
सस्पेंशन ऑफ जजमेंट की विचार की प्रक्रिया में क्या योगदान है?
क्या किसी को विचार करने का प्रशिक्षण दिया जा सकता है?

ऐसे और भी कई सवाल जो विचारों से संबंधित है उसके बारे में जॉन डीवी इस किताब में बात करते हैं। बहुत ही व्यापक विश्लेषण किया गया है । विचार से जुड़े हुए अलग-अलग पहलुओं को गहराई से देखा गया है।
फ्रांसिस बेकन की एक प्रसिद्ध उक्ति है मैं उसको इंग्लिश में ही रखता हूँ यहाँ…

some books are to be tasted others to be swallowed and some few to be chewed and digested”

मेरे ख्याल से इस पुस्तक को chewed and digested वाली श्रेणी में रखा जाना चाहिए। एकेडमिक दुनिया में अगर आप अभी नए- नए आए हैं तो मेरी सलाह है कि इसको आप अपना पहला पुस्तक नहीं बनाएँ शायद थोड़ा सा डिसकरेज हो सकते हैं। और अगर आप इस दुनिया से परिचित हैं तो फिर Dewey को नहीं पढ़ा तो क्या पढ़ा । डीवी की भाषा शैली बहुत ही ताकतवर है । किताब को पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि कैसे कोई इतनी सिस्टमैटिक तरीके से सोच सकता है और लिख सकता है, हर पंक्ति एक कोट नजर आता है।

कहाँ से प्राप्त कर सकते है?
यह किताब हिंदी में उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी मुझे नहीं है अगर आप में से कुछ लोग इसके बारे में पता करते हैं तो मुझे भी बताएं । इस किताब का पीडीएफ वर्जन आपको इंटरनेट पर मुफ्त में मिल जाएगा। अगर आप पेपर बैक खरीदना चाहते हैं तो किताब बेचने वाली किसी भी साइट पर यह उपलब्ध है। और मेरी तरह अगर किताबों के सुनने के शौकीन हैं तो फिर इसका पता है
https://play.google.com/store/apps/details?id=app.librivox.android

2 comments on How We Think_John Dewey

  1. Really appreciable work is done by you Mr Murari, this encourages reading writing and sharing too. Congratulations

  2. मुरारी जी, आपने यह पुस्तक परिचर्चा शृंखला आरम्भ करके वास्तव मे सरहनीय कार्य किया है। ज्ञान के सुधी पाठकों के लिए यह अत्यंत आनन्द दायक है। इसके लिए आप साधुवाद के पात्र हैं।

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