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“I am disappointed and in dilemma what should I do”

For a profession to attract outstanding students, it has to be desirable. It’s not difficult to understand what desirability is. We just need to ask a simple question… What are our outstanding students aspiring for? With common sense, one can answer- It’s medical, engineering and civil services. What makes these professions desirable? It is…regular and decent pay, greater career mobility, the opportunity for global exposure and a sense of agency.

कक्षा में शिक्षक

किसी कक्षा में एक शिक्षक क्या करे और क्या न करे इस विषय पर काफी कुछ कहा और लिखा जा चुका है।मेरी समझ से यह विषय इतना सरल भी नहीं है न ही इसे इतने हल्के में लिया जाना चाहिये। बल्कि शिक्षाविदों, शिक्षकों व बच्चों के दायरे में आने वाले इस महत्वपूर्ण विषय पर इससे प्रभावित होने वाले लोगों द्वारा गहन विचार विमर्श करके सहमति बनाई जानी चाहिए। इसे सरल मैं इसलिए नहीं मान रहा क्योंकि इसमें बाल मनोविज्ञान से लेकर शैक्षिक सिद्धांतों, दर्शन व व्यवहारिक ज्ञान का समावेश भी होता है। एक शिक्षक के रूप में अपने वर्षों के अनुभव से मैं इस संबंध में जो कुछ समझ बना पाया हूँ उसके अनुसार एक शिक्षक कक्षा में जो कार्य व्यवहार करता है उसे तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है। पहला है कक्षा कक्ष प्रबंधन, दूसरा नियोजन के अनुरूप पाठ कार्यान्वयन और तीसरा आकलन व्यवहार

स्कूलों में हाशियाकरण का शिकार होता हिंदी शिक्षण

मध्यवर्गीय अपेक्षाओं को अभिव्यक्ति देती आधुनिक स्कूली शिक्षा में हिंदी पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए काम करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। हिंदी दिवस पर हिंदी की महिमा उनकी समस्याओं का समाधान तो नहीं कर सकता लेकिन शायद उनकी समस्याओं को समझने में और उसके आसपास बातचीत शुरू करने में जरूर मदद कर सकता […]

Who the teachers are?

Why would parents pay a heed to a school’s outcry? They didn’t admit their children in a particular school because teachers teach their wards. That was not their concern. Neither school told them that it’s teachers who teach, not the infrastructure. Why should parents believe that teachers have a role in teaching or schools also have teachers?

‘Schools are Closed and Teachers are Free’

The ‘webinar -worriers’ ensure active participation by asking the participants to write in the chatbox. Webinars, scheduled for two hours, often shoots up to three hours. With a passing smile, the presenter says- “because of the lack of time I couldn’t go into the details, Kindly write in to me if you have a query!” So far, the school has not made it compulsory to write back to the presenter. They may do this as well… who knows?

शिक्षकों के गैर पेशेवर पहचान को बढ़ावा देती नई शिक्षा नीति।

पिछले दशकों में स्कूली शिक्षा का विस्तार हुआ है स्कूल जाने वाले उम्र के करीब करीब सभी बच्चे स्कूल में दाखिला लेते हैं। भारत में प्राथमिक कक्षाओं में NER100% तक पहुंच गया। लेकिन एक और विचित्र घटना इसके साथ साथ हो रही थी। जहां एक और शिक्षा का विस्तार हो रहा था वहीं दूसरी ओर शिक्षक के पेशेवर पहचान को महत्वहीन बनाया जा रहा था। एक ऐसा माहौल बनाया गया जहां बड़ी संख्या में गैर पेशेवर लोग भी शिक्षक की भूमिका में आ सकते हैं। ऐसा करने के पीछे मकसद यह रहा कि स्कूली शिक्षा पर होने वाले खर्च को घटाया जाए क्योंकि पेशेवर शिक्षक के वेतन की वजह से सरकारों पर खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा था। तमाम ऐसे शोध करवाए गए जिससे यह साबित हो सके की गैर पेशेवर लोग भी जब शिक्षक बनते हैं तो वे बच्चों को बेहतर पढ़ाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में संसाधन तो बचाया जा सका लेकिन शिक्षा को नहीं। गुणवत्ता के नए मानक गढ़ दिए गए। लेकिन खोखले मानक अधिक दिनों तक टिक नहीं सकते है।आज हमारे सामने ऐसी परिस्थिति है जहां स्कूलों में 95- 97% नंबर लाने वाले बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। हमारे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अत्यधिक दबाव में जीते हैं।  कई तरह की मानसिक और व्यावहारिक असंगतियाँ उनके व्यक्तित्व में पैदा हो रही है। एक समाज के तौर पर हमें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।

Exploring and Promoting Pluralism in School

This is a chapter from the RRCEE’s collection, ‘Voices Unheard’. Murari Jha was a Teacher fellow at RRCEE, CIE, University of Delhi in the year 2013-14. He worked on the theme ‘Exploring and Promoting Pluralism in School’ as a part of his fellowship. Shailaja Modem, who teaches at Gargi College, University of Delhi mentored him. […]

अपने शहर की तलाश में

शिव प्रकाश नींद में कुछ  जोर जोर से बोल रहा था, बगल में लेटी उसकी पत्नी, अनुप्रिया, झटपट मोबइल ऑन करती है और शिव प्रकाश क्या बोल रहा है उसको रिकॉर्ड करने लगती है। क्या पता कुछ राज की बात पता चल जाए। आदमी कई बार नींद में ऐसी बातें बोलने लगता है जो वह […]

LOCKDOWN #3

फोन की घंटी बहुत देर से बज रही हैं। फोन बेड के कोने वाले टेबल पर रखा हुआ है। राशि बेड पर लेटी हुई, न सो रही है न जाग रही है, लेकिन उठकर फोन उठाने का उसका मन नहीं कर रहा है।  फोन की घंटी बजती ही चली जा रही है। तभी दूसरे कमरे […]

Different Shades of Lockdown #2

फ्रिज खुलने की आवाज आते ही, हॉल में बैठी मंजू देवी बोल उठी…  “बहु दूध जरा संभाल के ही खर्च करना” बिना कोई जवाब दिए, सुनैना अपना काम करती रही। उधर मंजू देवी एक बार फिर से बोल उठी  “बेटे रमण,चाय पीने से पहले पानी पी लो, जैसे तैसे उठते हुए वह किचन की ओर […]

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