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Welfare Vs Identity Politics

दिल्ली में चुनावों के तारीख की घोषणा हो चुकी है। भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति के इतिहास में शायद पहली बार जन सरोकार की राजनीति का सीधा मुकाबला पहचान की राजनीति से है। वर्षों से पहचान की राजनीति केंद्र और राज्य के चुनावों में अपना दबदबा बनाए हुई है। पहचान की राजनीति से मेरा मतलब है धर्म, […]

Oh My God, Your Education Minister, Can’t Believe It !

“मैं अगर आपको कहूँ कि उस दूसरे कमरे में जाकर जेंटलमैन को बुला लाइये, अगर वहाँ तीन लोग खड़े हो, जिसमें से किसी एक ने सूट और टाइ पहन रखा हो तो आप सूट वाले को बुला लाएँगे। ये कैसे होता है, कब हमने जेंटलमैन की परिभाषा गढ़ दी” यह पहला मौका था जिसने मुझे […]

महिलाओं की आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा की ओर बढ़ता कदम।

आज से करीब-करीब 15 साल पहले कल्याणी और मैं मुनिरका में रहकर पढ़ाई करते थे। कल्याणी को हर रोज करीब 3 किलोमीटर दूर मोतीलाल नेहरू कॉलेज जाना होता था। बस में 2 रुपये का टिकट लगता था । वो अक्सर जाने और आने का 4 रुपया बचाने के लिए पैदल ही चली जाती थी। कई […]

सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास।

ये लो सिर्फ संस्कृत और ड्राइंग में तुम पास हो, कहते हुए मैम बच्चे के हाथ में पीले कलर का रिपोर्ट कार्ड पकड़ाती है। बच्चा खड़ा है, थोड़ी सी उदासी उसके चेहरे पे झलक रही है। सामने मम्मी अपने दो और बच्चों के साथ बैठी हुई है।मम्मी से यहां साइन करवा लो, यह कहते हुए […]

ART Meeting; An attempt to build the community of practitioners in Delhi Government Schools

Catch my rhythm and follow my beats” एक शिक्षक यह कहते हुए अपने हाथों से एक खास तरह का साउंड निकालते थे और उसी साउंड का नकल करते हुए बाकी कहते थे “Caught your rhythm and here is your beat” बारी-बारी से सभी शिक्षक अलग-अलग तरह का साउंड निकालते थे और बाँकी उनको फॉलो करते […]

मजबूत सरकारी स्कूल व्यवस्था के गवाह हैं, सिंगापुर के स्कूल।#3

आज का दिन था सिंगापुर के स्कूलों को देखने का l यकीन नहीं होता है कि इतने कम समय में कोई देश अपने यहां के स्कूलों को इतना बेहतरीन कैसे बना सकता है l कोई बहुत गौरवपूर्ण इतिहास नहीं रहा है सिंगापुर का। बहुत ही मुश्किलों का सामना यहाँ के लोगों ने किया। काफी सालों […]

A school Teacher’s Singapore Diary#2

शिक्षा से जुड़े हुए साहित्य को जब भी हम पढ़ते हैं तो पाते हैं कि शिक्षक के लिए कोई खास उत्साह समाज मे कभी नहीं रहा है। आज भी बहुत कुछ नहीं बदल गया है। कितने लोगों को आप अपने आसपास जानते हैं जो शिक्षक बनना चाहते हैं या अपने बच्चों(बेटों) को शिक्षक बनाना चाहते […]

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