ART Meeting; An attempt to build the community of practitioners in Delhi Government Schools

Catch my rhythm and follow my beats” एक शिक्षक यह कहते हुए अपने हाथों से एक खास तरह का साउंड निकालते थे और उसी साउंड का नकल करते हुए बाकी कहते थे

“Caught your rhythm and here is your beat” बारी-बारी से सभी शिक्षक अलग-अलग तरह का साउंड निकालते थे और बाँकी उनको फॉलो करते थे और इस तरह शुरू हुआ दिल्ली के मेहरामनगर स्थित सर्वोदय को एड स्कूल में एक शानदार ART मीटिंग। मीटिंग को संचालित कर रही थी वहां की TDC,प्रिया मैम, जो उसी स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।

बारी-बारी से सभी शिक्षक अलग-अलग तरह का साउंड निकालते थे और बाँकी उनको फॉलो करते थे और इस तरह शुरू हुआ दिल्ली के मेहरामनगर स्थित सर्वोदय को एड स्कूल में एक शानदार ART मीटिंग। मीटिंग को संचालित कर रही थी वहां की TDC,प्रिया मैम, जो उसी स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।

यह सब आखिर क्या है? क्या है ART ? कौन होते हैं TDC? और भला स्कूलों में इस तरह की मीटिंग का क्या मतलब है।

मेंटर टीचर प्रोग्राम के सबसे शानदार पहलुओं में से एक है, एक से बढ़कर एक बेहतरीन शिक्षक साथियों से मिलने का, उनके कामकाज को देखने का तथा उनसे बातचीत करने का मौका मिलना। भारत में शिक्षा का साहित्य इस बात का गवाह है कि भारत मे लगातार शिक्षकों को इंटेलेक्चुअल आइसोलेशन में रखा गया है। मेंटर टीचर प्रोग्राम और उसी से जुड़े हुए कुछ और प्रोग्राम जैसे कि स्कूलों में एकेडमिक रिसोर्स टीम( ART) का गठन, टीचर डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटर प्रोग्राम, इत्यादि, इस इंटेलेक्चुअल आइसोलेशन को तोड़ने में बहुत मददगार साबित हो रहा है।
कोई भी प्रोफेशनल कम्युनिटी यानी कि एक जैसे पेशे में लगे हुए लोग जब एक साथ आते हैं और अपने काम के बारे में बातचीत करते हैं, उसको और आगे कैसे बढ़ायें, उसमें नई बातें कैसे लाया जाए, उसमें रिसर्च कैसे हो, उस काम से जुड़ी हुई समस्याएं क्या है,इन सब बातों पर जब वह विचार करते हैं, तो इसी प्रक्रिया से एक प्रोफेशनल कम्युनिटी बनती है।

कई बार यह प्रक्रिया बहुत सहज भी होती है। यहाँ तक कि किसान जो खेतों में काम करते हैं जब वह आपस में बैठते हैं तो अपने फसलों के बारे में,कीटनाशकों के बारे में, फसलों से जुड़ी हुई अन्य समस्याओं के बारे में बातचीत करते हैं। पता नहीं क्यों लेकिन शिक्षकों के बीच यह एक सहज प्रक्रिया के रूप में विकसित नहीं हुआ। करीब 10 वर्षों से स्कूली शिक्षा का हिस्सा होने के नाते मेरे अनुभव में यह आया है कि जब भी शिक्षक आपस में बैठते हैं, बातचीत करते हैं तो वह अपने क्लास रूम के प्रैक्टिस के अलावा बाकी हर तरह की बात-चीत करते हैं। क्लासरूम प्रैक्टिस से यहाँ मेरा मतलब है कि वह क्या पढ़ा रहे हैं,किस विधि का उपयोग कर रहे हैं,किसी खास कंटेंट को पढ़ाते हुए किस तरह चैलेंजएज आ रहे है और क्या नई बातें सीखने को मिल रही है, इत्यादि। इन सब की जगह कुछ अलग तरह की बातचीत अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाए रखती है, जैसे कि आज किस बच्चे के बैग में सिगरेट का डब्बा पकड़ा गया है, स्कूल से भागने की कोशिश किसने की है, कौन लड़का और लड़की एक साथ देखे गए हैं, कौन से बच्चे आज प्रिंसिपल ऑफिस के सामने बैठे हुए हैं, किसके पेरेंट्स को बुलाया गया है, इत्यादि।

इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली सरकार के स्कूलों में यह कोशिश की गई है कि शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाए और इसके लिए बहुत जरूरी है कि कम्युनिटी ऑफ प्रैक्टिशनर की अवधारणा को स्कूलों के अंदर विकसित किया जाए। हर स्कूल में एक टीचर डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटर(TDC) प्रिंसिपल के द्वारा चुना गया है, और TDC, को सहायता देने के लिए ART टीम का गठन किया गया है जिसमें सभी विषयों से कम से कम 1 शिक्षक शामिल होते हैं। TDC की अध्यक्षता में ART की नियमित रूप से हर महीने एक बैठक होती है जिसमें क्लास रूम के अंदर शिक्षा से जुड़े नवाचारों की चर्चा की जाती है।

किसी भी नई व्यवस्था को अपनी जड़ें जमाने में वक्त लगता है। TDC एवं ART की अवधारणा को स्कूलों के अंदर अपनी जड़े जमाने में वक्त लग रहा है। लेकिन जिस डेडीकेशन के साथ कुछ TDC काम कर रहे हैं उसको देख कर इस प्रोग्राम की सफलता सुनिश्चित नजर आती है। एक बार फिर लौटते है, मेहराम नगर के सरकारी स्कूल में आयोजित ART मीटिंग में।

एक बार फिर लौटते है, मेहराम नगर के सरकारी स्कूल में आयोजित ART मीटिंग में। प्रिया जी के नेतृत्व में आयोजित ART की मीटिंग में भाग लेने का मुझे मौका मिला और उस मीटिंग की भव्यता को सही शब्दों में उतार पाना मुश्किल है।

आज की मीटिंग का एजेंडा था कि शिक्षक साथियों से ‘नो हैंड्स’ जो एक्टिविटी थी उसके बारे में बातचीत करना। ‘नो हैंड्स’ क्या होता है और उससे जुड़ी हुई तमाम तकनीकी जानकारी वह पहले से ही चार्ट पेपर पर लिख कर आई हुई थी जो सामने वाले दीवार पर लगा दिया गया था, साथ ही यह सभी जानकारी पीपीटी के माध्यम से भी शिक्षकों के सामने लाया जा रहा था। TDC जब अपने शिक्षक साथियों से बातचीत करते हैं तो यह एक अनोखा अनुभव होता है क्योंकि एक TDC अपने शिक्षक साथियों के साथ उसी स्कूल में रहते हैं और क्लास में पढ़ाते हैं । और अचानक एक दिन वे अपने शिक्षक साथियों को ही सीखने में मदद करने के रोल में आ जाते हैं, एडल्ट लर्निंग पूरी तरह से एक अलग क्षेत्र है। बहुत मुश्किल होता है एडल्ट लर्निंग के क्षेत्र में पूरे आत्मविश्वास और सहजता के साथ काम करना। अपने शिक्षक साथियों के सामने प्रिया जी की, सहजता और आत्मविश्वास देखने लायक थी। ART टीम में उनके सामने सभी शिक्षक सदस्य उनसे ज्यादा उम्र के थे। कई शिक्षक ऐसे भी थे जिनके पास लगभग तीन दशक से ज्यादा का पढ़ाने का अनुभव है लेकिन उनको भी इतनी सहजता के साथ वह बातचीत में शामिल करवा पा रही थी, उनसे सवाल पूछ रही थी। यह सब देखना मेरे लिए एक बेहतरीन अनुभव था। और सबसे महत्वपूर्ण है इस मीटिंग को ले कर TDC की तैयारी, इससे यह झलकता है कि वह कितना गंभीर है इसको लेकर और उनकी गंभीरता ही इस मीटिंग को महत्वपूर्ण बनाता है अन्यथा कई स्कूलों में मेरा यह अनुभव रहा है कि ART मीटिंग को महज एक औपचारिकता ही समझा जाता है । मीटिंग के दौरान जरूरत की सभी छोटी से छोटी चीजों का उन्होंने पहले से ही इंतजाम किया हुआ था जैसे कि चार्ट पेपर, हैंड आउट्स, कलरफुल स्टिक्स ऑडियो -विजुअल मटेरियल, इत्यादि। मीटिंग की शुरुआत वह एक बहुत ही दिलचस्प वार्म अप एक्सरसाइज से करती हैं। फिर उसके बाद सभी साथियों को मौका दिया जाता है कि पिछले मीटिंग में जो बातें हुई थी वह किस प्रकार क्लास रूम में उनके प्रैक्टिस का हिस्सा बन पाया, किस तरह की समस्याएं आयी, यह साझा करने का। सभी साथियों ने एक-एक करके उस बारे में अपनी राय रखी । फिर उन्होंने इस मीटिंग के एजेंडे को इंट्रोड्यूस किया और उसके बारे में चार्ट्स और पावर पॉइंट के जरिए बताया गया। इसके बाद फिर मौका था साथियों से उस बारे में डिस्कस करने का और सभी साथियों को इस में भाग लेने के लिए उन्होंने मौका दिया। इस मीटिंग की सबसे खास बात रही इसको समाप्त करने का तरीका। बहुत सलीके से मैम एक म्यूजिक चुनकर लायी थी। सामने के प्रोजेक्टर स्क्रीन पर म्यूजिक और लिरिक्स चलने लगा और साथ में मीटिंग में भाग लेने वाले सभी सदस्य साथी गा रहे थे

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के……

इस गाने के बोल और सामने दिखने वाले विजुअल्स इतना सुकून देने वाला था,यह सबके दिल के तारों को छेड़ रहा था, और मैं देख पा रहा था कि सब कितने तल्लीन हो कर सुन रहे हैं,गा रहे हैं। और यह देखते हुए मुझे याद आ रहा था कहीं सुना हुआ यह कोट

“People with greatest mind is admired by all but people with affectionate heart is loved by all”

मीटिंग के अंत में प्रिया मैम के द्वारा किया गया यह प्रयास लोगों के दिलों को छू रहा था। आप भी सुनिए ये गाना

आप भी सुनिए ये गाना

https://youtu.be/6J9okctVu58

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