मजबूत सरकारी स्कूल व्यवस्था के गवाह हैं, सिंगापुर के स्कूल।#3

आज का दिन था सिंगापुर के स्कूलों को देखने का l यकीन नहीं होता है कि इतने कम समय में कोई देश अपने यहां के स्कूलों को इतना बेहतरीन कैसे बना सकता है l कोई बहुत गौरवपूर्ण इतिहास नहीं रहा है सिंगापुर का। बहुत ही मुश्किलों का सामना यहाँ के लोगों ने किया। काफी सालों तक अंग्रेजों का राज रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के समय कुछ वर्षों तक जापानी साम्राज्य का हिस्सा रहा और फिर कुछ वर्षों तक मलेशिया का हिस्सा रहा। और अंत में 1965 में स्वतंत्र सिंगापुर के रूप में इस राष्ट्र की स्थापना हुई। एक बुजुर्ग बता रहे थे कि यहाँ के स्कूलों में 4-4 अलग-अलग तरह के राष्ट्रगान गाये गए हैं।
बहुत ही कम समय में यहां की स्कूली व्यवस्था की काया पलट कर दी गई और आज यह दुनिया की सबसे बेहतरीन स्कूल व्यवस्था में गिनी जाती है। स्कूल विजिट के दौरान बार-बार हमें बताया जा रहा था कि यह सब कुछ सिर्फ इसलिए संभव हो पाया की शिक्षा को लेकर के यहां हमेशा से एक बहुत ही जबरदस्त पॉलिटिकल विल रही है और मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन लगातार इस बात पर बल देती रही है कि सिंगापुर को दुनिया की सबसे बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था में गिना जाए।
दूसरी वजह यह भी बताई जा रही है कि इनके पास किसी भी प्रकार का कोई नेचुरल रिसोर्स नही हैं। यहाँ तक कि पीने का पानी भी खरीदना होता है इस देश को। ह्यूमन रिसोर्स ही इनका एकमात्र रिसोर्स है। इस वजह से ये शिक्षा के क्षेत्र में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

यहाँ शिक्षक की नौकरी को बहुत अहमियत दी जाती है। एक शिक्षक की तनख्वाह IAS या मिलिट्री ऑफिसर के बराबर होता है। साथ ही प्राइमरी में पढ़ाने वाले शिक्षक की तन्खाह सेकेंडरी या सीनियर सेकेंडरी में पढ़ाने वाले शिक्षक के बराबर होता है। यानी कि शिक्षा के पेशे से जुड़े जो भी आदर्श बातें हम सोच सकते हैं, उसे यहाँ लागू किया गया है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर बहुत जोर है। जब कोई शिक्षक प्राइमरी से निकलकर सेकेंडरी में पढ़ाना चाहते हैं, तो फिर उन्हें NIE आकर प्रशिक्षण लेना होता है। स्कूल के स्तर पर सभी शिक्षकों के लिए मेंटर टीचर की व्यवस्था है।
रिसर्च पर काफी जोर है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस बात को ऑब्जर्व किया जाता है कि क्लासरूम में बच्चे किस तरह की बातचीत करते हैं, उनका हाव- भाव कैसा होता है, फिर उसका विश्लेषण किया जाता है और शिक्षण को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए जरूरी सुधार किया जाता है।
मेरे ख्याल से पब्लिक एजुकेशन की सफलता की यह कहानी हम सब मे यह विश्वास पैदा कर सकता है, कि अभी सब कुछ बर्बाद नही हुआ है। हमारे यहाँ तो ज्ञान की शानदार परंपरा रही है।
मेरे ख्याल से पब्लिक एजुकेशन की सफलता की यह कहानी हम सब मे यह विश्वास पैदा कर सकता है, कि अभी सब कुछ बर्बाद नही हुआ है। हमारे यहाँ तो ज्ञान की शानदार परंपरा रही है। सिर्फ पोलिटिकल विल की कमी है। दिल्ली जैसे छोटे से राज्य ने यह दिखा दिया है कि पोलिटिकल विल हो तो पब्लिक एजुकेशन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह सही मौका है जिस किसी भी दल को आप चुने उनका शिक्षा के प्रति कमिटमेंट कैसा है, इसका पता लगाइये। यहाँ सिंगापुर के लोग बड़े राष्ट्रवादी हैं। शिक्षा के प्रति इनका कमिटमेंट एक मजबूत राष्ट्र बनाने की इनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। सोचिए, बिना मजबूत शिक्षा व्यवस्था के हम कैसे मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

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